Posted by: yaxa | मार्च 31, 2010

प्रश्न : एक अपठनीय कविता

Prashna

प्रश्न कितने हैं न जाने, एक भी उत्तर नहींPrashna Icon

यक्ष आतुर प्रतीक्षारत, वह स्वयम् प्रस्तर नहीं 

 

Prashna Icon प्रश्न करने या न करने से भला क्या प्रयोजन

परस्पर भाषा-कलह में एक भी अ-“क्षर” नहीं

 

जूझती बैसाखियों पर मौत लादे प्रश्नहीनPrashna Icon

मूर्त्त जीवट स्वयं, निस्पृह लोग ये कायर नहीं

 

Prashna Iconप्रश्न-उत्तर, लाभ की संभावनाओं से परे

अर्थवेत्ता-प्रबन्धक कोई अत: तत्पर नहीं

 

सब सहज स्वीकारने का मार्ग सर्वोत्तम सही Prashna Icon

साधना-पथ पर “सहज” से अधिक कुछ दुष्कर नहीं

Prashna Icon

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: